रात के साए मैं
बैठी हुई थी वो
आँखों मैं सपने लिए
ताके तारों की ओर
दिल मैं हलचल सी
इक सोच यां था शोर
छण मैं बदलती है
पल मैं संभलती है
इन अरमानों के आँचल मैं
तम्मानाएं रंग बदलती हैं
बैठी हुई थी वो
आँखों मैं सपने लिए
ताके तारों की ओर
दिल मैं हलचल सी
इक सोच यां था शोर
छण मैं बदलती है
पल मैं संभलती है
इन अरमानों के आँचल मैं
तम्मानाएं रंग बदलती हैं
No comments:
Post a Comment